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ह से हिंदू म से मुसलमान ‘हम’ से बना हिंदुस्तान – – –

मुश्ताक अहमद/रिफाकत अली

मेरठ। दो बुजुर्ग दोस्त ६0 साल के हाजी ताहिर प्रधान और ६2 साल रणबीर लोगों के लिए मिसाल हैं। कहते हैं ह पहले है यानि हिंदू बड़े भाई और म बाद में मतलब मुसलमान छोटे भाई की भूमिका मे हैं। दोनों का मेल ही हिंदुस्तान को अलग बनाता है।

भजन गाने मंदिर में जब रसखान आते हैं,मंजर देखने ऐसा वहां भगवान आते हैं। फिरका परस्ती उस जिले को छू नहीं सकती, बनाने राम की मूरत जहां मुसलमान आते हैं – – –

उत्तर प्रदेश में मेरठ जिले के हर्रा कस्बे में ऐसा ही मंजर तब सजता है,जब लंबी सफेद दाढ़ी और सिर पर इस्लामी गोल टोपी पहने हाजी ताहिर प्रधान कावंड़ियों को जलपान कराते हैं।

इस परंपरा की शुरुआत बाल सखा रणबीर के संग मिलकर कराया है। हर्रा कस्बे में चाहे सावन का आयोजन हो या फिर महाशिवरात्रि हाजी ताहिर अपना काम छोड़कर शिव भक्तों की सेवा में रमे नजर आते हैं। ऐसे किसी भी अवसर पर हर्रा के इस रसखान को यहां शिव का गुणगान करते देखा जा सकता है। रणबीर भी हाजी ताहिर के साथ ईद- बकरीद,मुहर्रम आदि त्यौहारों की खुशी साझा करते हैं। यह दोस्ती आज की नहीं बल्कि 6 दशक पुरानी है।

60 साल के हाजी ताहिर और 62 साल के रणबीर की मित्रता इलाके में मिसाल है। वे बाल सखा साझा संस्कृति की उस विरासत की झलक देते हैं, जिस पर देश टिका हुआ है। श्रृद्धालुओं के सहयोग और इस वयोवृद्ध जोड़ी की मेहनत से हर्रा इलाके में यह परंपरा कायम है। रणबीर इस परंपरा को कायम रखने में अहम भूमिका निभाते आ रहे हैं। खास मौकों पर वह अनिवार्य रुप से मौजूद होते हैं।

रिश्ता
दो बुजुर्ग दोस्त बने दोस्ती की मिसाल ६0 साल के प्रधान हाजी ताहिर और ६2 साल के रणबीर समझा रहे हिंदुस्तान का फलसफा

हम हैं तो हिंदुस्तान है – – –

हिंदू-मुस्लिम, मंदिर-मस्जिद, सीएए के नाम पर नफरत की दीवार खड़ी करने वालो को इनसे  सीख लेनी चाहिए। हाजी ताहिर और रणबीर इसको अपवाद बताते हैं। और इसे फिरका परस्त नेताओं की साजिश बताते हुए बहकावे में न आने को कहते हैं। दोनों धर्म और दीन की पहली सीढ़ी मुहब्बत को बताते हैं। अपनी दोस्ती पर दोनों कह पड़ते हैं – – -। हम हैं तो हिंदुस्तान है – – -। हम का मतलब समझाने लगते हैं- – – ह से हिंदू म से मुसलमान। ह पहले है यानि हिंदू बड़े भाई और म बाद में मतलब मुसलमान छोटे भाई की भूमिका में है। दोनों का मेल ही हिंदुस्तान को दुनिया से अलग बनाता है।

ये लिए बढ़चढकर हिस्सा
प्रधान हाजी ताहिर ही नहीं हाजी माजिद चौहान, हाजी हसनैन, हाजी अब्दुल्ला, नदीम चौहान व गफ्फार पहलवान ने मेरठ व हर्रा कस्बे में गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश की है।

” मैं और हाजी ताहिर बचपन के साथी हैं। हम दोनों की मेहनत और गांव के श्रद्धालुओं के सहयोग से दुर्गा पूजा व कावंड़ियों का जलपान के साथ ही दवाई की व्यवस्था कराई गई है।
रणबीर-

 

” ईश्वर एक है। हर कोई उसे अपने-अपने तरीके से मानता और पूजता है। हमने वही किया है जो ऊपर वाले ने हमसे कराया। मंदिर-मस्जिद, दरगाह आकर मन को सुकून मिलता है।
हाजी ताहिर

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