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अब बदमाशों के काम न आएगा शराफत का लबादा,नकाब उतार देगा शहबाज और नफीस का ये तकनीक 

मुश्ताक अहमद

अपने शहर में शराफत का लबादा ओढ़कर देश के किसी अन्‍य हिस्‍से में अपराध को अंजाम देने वाले बदमाशों की अब खैर नहीं है।

ऐसे अपराधी अब नहीं छिपा सकते अपनी पहचान।

गोंडा का शहबाज व गोरखपुर का नफीस उनकी असली पहचान कर देगा जाहिर।

गोंडा। ‘सात घर तो डायन भी छोड़ देती है’ वाली पुरानी कहावत को मानते हुए अपने शहर में शराफत और देश के किसी अन्‍य हिस्‍से में अपराध करने वालों के चेहरे से मुखौटा अब उतर जाएगा। खास इसी काम के लिए गोंडा का शहबाज व गोरखपुर नेशनल क्राइम रिपोर्ट ब्यूरो ने ‘नफीस’ यानी नेशनल ऑटोमेटिक फिंगर प्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम नामक साफ्टवेयर तैयार किया है।

शहबाज व नफीस के सामने आने के बाद अपराधी अपनी असली पहचान नहीं छिपा पाएगा। शहबाज और नफीस उसकी पूरी कुंडली खोलकर रख देगा। शहबाज व नफीस के जरिये पुलिस को यह तय करने में भी देरी नहीं लगेगी कि जिसे पकड़ा गया है वह किस स्तर का अपराधी है और वह कितना सच या झूठ बोल रहा है।

दरअसल,कई ऐसे अपराधी हैं जो अपने शहर में तो शरीफ होते हैं लेकिन अन्य शहरों में क्राइम करते हैं। कई बार तो वह अपना नाम और पहचान भी गलत बताकर जेल चले जाते हैं जब छूटते हैं तो घर आते हैं और फिर उनके बारे में कोई जानकारी नहीं हो पाती है। यहीं नहीं कुछ अपनी पहचान छिपाकर विदेश तक भाग जाते हैं।


नए सॉफ्टवेयर शहबाज व नफीस में पकड़े गए अपराधी और सजा पाने वाले अपराधियों के फिंगर प्रिंट स्कैन कर उनका आपराधिक डाटा सबमिट किया जा रहा है। इसमें दो स्कैनर है। पहला माफोटॉप लाइव प्रिंटर और दूसरा फ्लैट बैट प्रिंटर है। अपराधी अगर पकड़े जाने पर अपनी पहचान छुपा रहा है और पुलिस उसकी पहचान नहीं कर पा रही है तो इस सिस्टम पर उसके फिंगरप्रिंट स्कैन कर उसकी पूरी जानकारी ली जा सकती है।

प्रदेश के सभी जिलों में लगाया गया सॉफ्टवेयर
केंद्र सरकार की योजना के तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों में ‘नफीस’ नेशनल ऑटोमेटिक फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम लगाया गया है। इसके अलावा सभी जीआरपी थानों, एसटीएफ कार्यालय, एटीएस और पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में यह सिस्टम लगाया गया है। इस महीने के अंत तक गोरखपुर में भी यह सिस्टम काम करने लगेगा।

बदमाश जब पकड़े जाएंगे तो ‘नफीस’ के सामने ले जाया जाएगा। अपराधियों के फिंगरप्रिंट के साथ उनका पूरा डाटा उपलब्ध रहेगा। अभी तक पुलिस बदमाशों का फोटो लेती थी लेकिन ‘नफीस’ में उनका फिंगर प्रिंट स्कैन कर रखा जाएगा, इससे कभी भी कहीं भी उसकी असल पहचान तय हो सकेगी।

वारदात को आते हैं सबसे ज्यादा बाहरी बदमाश
गोरखपुर में दूसरे जिलों से आकर बदमाश सबसे ज्यादा वारदात को अंजाम देते हैं और फरार हो जाते हैं। दस साल में तैयार पुलिस के एक आंकड़े के मुताबिक 679 बदमाश ऐसे हैं जो गोरखपुर के आस-पास जिलों के रहने वाले हैं और उन्होंने अपने क्राइम का क्षेत्र गोरखपुर को बनाया है। ये अपने इलाके में तो शरीफ हैं पर यहां की पुलिस के रिकॉर्ड में क्रिमिनल हैं।

जोन के ऐसे बदमाश जो दूसरे जिले में करते हैं क्राइम
612: बदमाश अन्य जिलों में हत्या करते हैं
86: बदमाश लूट या रेप के साथ हत्या करते हैं
361: बदमाश जो डकैती डालते हैं
1286: बदमाश जो लूट की घटना करते हैं
गोरखपुर में आकर वारदात करने वाले बदमाश
134: ने यहां आकर हत्या की
17: ने महिलाओं से लूट या रेप के बाद हत्या की
167: ने डकैती डाली
361: ने लूट की

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