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प्रतिभा पहचान की नहीं होती मोहताज,यहां तबले पर थिरक रही चौदह साल के बच्चे की उँगलिया।

मुश्ताक अहमद

गोंडा।होनहार बिरवान के होत चीकने पात, की कहावत गोंडा जिले के वजीरगंज विकास खंड की जमुनहा मझरेती गांव के 12 वर्षीय किशोर पर एकदम सटीक बैठ रही है जो तबला वादक बनने की राह पर चल निकला है। तबला वादक के लिए उसकी प्रसंशात्मक चर्चा घर व स्कूल की चहारदीवारी से निकलकर आसपास के गांवों में होने लगी है।
लोग कहते है कि पूत के पांव पालने में ही नजर आने लगते है,फिर प्रतिभा किसी पहचान की मोहताज नही होती वह तो समय के साथ लोगों का परिचय खुद करती है। ये सारी कहावत 12 वर्षीय किशोर उस्ताद जमुनहा निवासी सत्य नारायण शुक्ल के पौत्र प्रीत शुक्ल पर सटीक बैठती है।

तबले पर थिरकती इस नन्हे उस्ताद की उंगलियां मजे हुए तबला वादक होने की पहचान कराती है। न किसी की शागिर्दी न कोई प्रशिक्षण मोबाइल पर गाना बजा कर रियाज करता है। कक्षा 6 में पढ़ रहे इस नन्हे उस्ताद की वादन के प्रति रुझान के बारे में इनके बाबा सत्यनरायन शुक्ल कहते है कि मोबाइल और टीवी पर बजते गाने पर तख़्त व जमीन या फिर बरतनों को लेकर बज रहे गानों पर ताल से ताल मिलाने लगता उससे प्रभावित होकर तबला दिला दिया अब उसी पर गाना बजा कर रियाज करता है। दो भाइयों में बड़े इस नन्हे उस्ताद की तबला वादन के प्रति लगाव इसे भविष्य का तबला उस्ताद बताया जा रहा है।

इनके बाबा धार्मिक विचार के व्यक्ति है और भजन गायक भी है और रामलीला में अभिनय भी करते रहे है। पिछले दो-तीन सालों से इनके आँख की रोशनी कम हो गयी तो ये नन्हा उस्ताद उनकी आँख भी बन गया। कही भी धार्मिक कार्यक्रम में ये उनके साथ जाता है और कार्यक्रम तबला वादन भी करता है। इसकी उम्र के साथ वादन क्षमता को देख कर हर किसी की जुबान से बरबस निकल पड़ता है वाह उस्ताद। और मिलती है ढेर सारी शुभकामनाएं। साथ में सुझाव भी की कोई संगीतज्ञ इसे तराश कर हीरा बनाये।

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