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देसी माटी में विदेशी फूलों से महक रही लोगों की जिंदगी,रंग ला रही मेहनत

इमरान अहमद

5 हेक्टेयर में ग्लाइड्स और गुलाब के साथ एक एकड़ में पहुंचा हालैंड के पचरंगी फूलों की खेती का रकबा

फूलों की खेती कर महिलाएं भी फहरा रहीं नारी सशक्तिकरण का झंडा

गोंडा।उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में वजीरगंज की देशी माटी में विदेशी फूलों की महक से किसानों के समृद्धि के द्वार खुल रहे हैं। हालैंड के पचरंगी फूलों की खेती कर पुरुषों के साथ महिलाएं भी अपनी जीवट के बूते कौशल दिखाते हुए नए कीर्तिमान बना रही हैं। पारंपरिक खेती के स्थान पर फूलों की हाइटेक खेती अपनाकर अपनी मेहनत और लगन से यहां के किसान कृषि क्षेत्र में एक नया मुकाम हासिल कर रहे हैं। भगोहर में जरबेरा नामक हालैंड में फूलों का उत्पादन किया जा रहा है। यहां उत्पादित रंग-बिरंगे फूल दिल्ली, मुम्बई, लखनऊ व पड़ोसी देश नेपाल की बाजारों में जलवा बिखेर रहे हैं। भारतीयों के साथ विदेशियों को भी फूलों के चटक रंग की छटा खूब भा रही है।


देशी माटी में विदेशी फूलों की खेती करने का जोखिम सबसे पहले खुर्दहा निवासी अभिनव सिंह ने भगोहर से शुरु की। चार हजार वर्ग मीटर में फूलों की खेती करके वह विख्यात होते जा रहे हैं। इनकी देखा-दूनी से वजीरगंज के दर्जनभर से अधिक किसान ग्लाइड्स व गुलाब फूल की खेती कर विसंगतियों का मिथक तोड़ रहे हैं। साथ ही औरों के लिए उदाहरण भी बन रहे हैं। इनमें महिलाएं आगे हैं। भगोहर की रेहाना, कुसुम, शलमा, फात्मा, शिखा, नाजिम, गेंदा देवी, कलावती, प्रियांशी, निशा, सुंदरपता, नदई पुरवा के संतोष देशी माटी में विदेशी फूल यानि ग्लाइड्स लगाकर अपनी आर्थिक हालत को मजबूत कर रहे हैं। गुलदस्ते बनाने के साथ ही समारोह और उत्सवों में सजावट के काम आने वाले इन फूलों के छल्ले भारत के बाजारों तक ही नहीं, बल्कि इनकी खुशबू नेपाल तक पहुंचने लगी है। अभिनव कहते हैं कि यह तो यहां के खेतों की मिट्टी का कमाल है। वे बताते हैं कि एक वर्ष पूर्व जरबेरा की खेती शुरू की थी। हाइटेक खेती जबसे शुरू की है तबसे वाकई उनके समृद्धि के द्वार खुल गये हैं। उद्यान विभाग के योजना प्रभारी बताते हैं कि विदेशी फूलों की खेती की महक से किसानों के समृद्धि के द्वार खुल रहे हैं। वे बताते हैं कि चार वर्षो में फूलों की खेती का रकबा तेजी से बढ़ा है। गेंदा, गुलदाउदी व गुलाब जैसे पारंपरिक  फूलों की खेती के साथ ही किसान विदेशी प्रजाति के फूलों को भी दिल से आजमा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जरबेरा फूल की खेती के लिए किसानों को 50 फीसद अनुदान दिया जा रहा है। साथ ही पांली हाउस बनाने में भी सरकार इतना ही अनुदान दे रही है।

मन-मोहक रंगों वाली ये हैं प्रजातियां
जरबेरा की मन-मोहक रंगों की वाली पांच प्रजातियां हैं। सभी प्रजातियों के फूलों के रंग अलग-अलग हैं। बेलंस प्रजाति सफेद, डैना रालेन पीला, रोजलिन, पिंक, ग्लेरियर, नारंगी, सेलवाडोर नामक प्रजाति में लाल रंग के फूल होते.हैं।

20-25 डिग्री तापमान में होता है जरबेरा का उत्पादन
जरबेरा के उत्तम उर्वरता के फूल उत्पादन के लिए दिन का तापमान 20-25 डिग्री सेल्सियस व रात का औसत तापमान 12-16 डिग्री सेल्सियस अति उत्तम है। वैसे तो जरबेरा की खेती खुले में भी की जाती है, लेकिन अर्द्ध छायाकार स्थान अधिक उपयुक्त रहता है। छाया करने के लिए 50 फीसद छाया के नेट का प्रयोग किया जाता है। खेतों में पांली हाउस बनाकर जरबेरा की पौध उगाई जाती हैं। पानी और धूप इस पौध को बचाने की चुनौती भी कम नहीं है। इसके लिए 200 माइक्रान की विशेष पाली फिल्म इजराइल से मंगाई जाती है। तैयार पालीहाउस प्लांट में 12 माह तक फूलों का सकल उत्पादन किया जा सकता है।

विश्व के 10 फूलों में शामिल है जरबेरा
जरबेरा लंबी डंडी वाला व्यवसायिक कट फूल है। इस व्यवसायिक पुष्प की खेती सभी प्रकार की जलवायु  में सफलतापूर्वक की जा सकती है। जरबेरा की आयु काफी होती है। इस कारण यह फूल विश्व के 10 फूलों में गिना जाता है। जरबेरा का तना रहित पौधा एस्टैरेसी कुल का सदस्य है। एक वर्षीय शाकी पौधों की श्रेणी में आता है। फूलों के तने पतले तथा पत्तियां रहित होते हैं। फूल इकहरे, दोहरे व आधे दोहरे प्रकार की पंखुड़ियां की लाइनों के आधार पर होते हैं।

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