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तुलसीपुर विधानसभा:साइकिल की हवा निकाल सकते हैं बाहुबली रिजवान जहीर।

मुश्ताक अहमद (यूपी लाइव न्यूज)

▶समाजवादी पार्टी से टिकट न मिलने पर जेल से निर्दलीय लड़ेंगे चुनाव।

▶2017 में दूसरे स्थान पर रहीं कांग्रेस प्रत्याशी जेबा रिजवान।

तुलसीपुर-बलरामपुर।भारत-नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटा तुलसीपुर विधानसभा यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के लिए प्रतिष्ठापूर्ण रहा है। यहां से मौजूदा विधायक कैलाशनाथ शुक्ला ने बाहुबली पूर्व सांसद रिजवान जहीर की बेटी जेबा रिजवान को शिकस्त दी थी। जेबा कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ी थीं, जबकि शुक्ला बीजेपी से मैदान में उतरे थे। 2022 के विधानसभा चुनाव में हालात जुदा हैं। मई 2021 में रिजवान जहीर बेटी के साथ साइकिल की सवारी कर लिए थे। इस बीच वक्त ने करवट बदला और वे बेटी व दामाद के साथ पूर्व चेयरमैन के कत्ल की साजिश के आरोप में गिरफ्तार कर जेल चले गए।

मशहूर गीतकार गुलजार की एक गजल की लाइनें हैं कि-सबको मालूम है बाहर की हवा है कातिल, यूं ही कातिल से उलझने की जरूरत क्या है? तुलसीपुर से तीन बार विधायक रहे बाहुबली रिजवान जहीर पर ये पंक्तियां एक दम सटीक बैठती हैं। दरअसल, समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद उन्होंने जिस तरह सरकार, सिस्टम और सत्ताधारी दल के दिग्गज नेताओं के खिलाफ मोर्चा संभाला था, उससे यह तय हो गया था कि रिजवान जहीर और उनकी बेटी का आगे का सियासी सफर कांटों भरा हो सकता है। तुलसीपुर के पूर्व चेयरमैन व मौजूदा चेयरमैन के प्रतिनिधि पप्पू की हत्या का षडयंत्र रचने के आरोप में पिछले महीने रिजवान, उनकी बेटी जेबा और दामाद समेत छह लोगों को जेल भेज दिया गया। इसके बाद ही उनके पॉलिटिकल कैरियर पर ग्रहण लग गया। जेल जाने के बाद जब विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां बढ़ीं तो यह कयास लगाया जाने लगा कि समाजवादी पार्टी रिजवान या उनकी बेटी जेबा को तुलसीपुर से मैदान में उतारेगी। लेकिन तीन दिन पहले जारी लिस्ट में पूर्व विधायक अब्दुल मशहूद खान को सपा ने प्रत्याशी घोषित कर यहां की राजनीति में भूचाल ला दिया। रिजवान समर्थकों ने विरोध शुरू कर दिया तो जेल में बंद रिजवान जहीर के पक्ष में सहानुभुति की बयार बह चली और सोशल मीडिया पर समर्थकों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोत्तरी होने लगी। रिजवान जहीर जेल में रहकर ही निर्दलीय चुनावी अखाड़े कूद गये। शुक्रवार को बेटी देबा रिजवान ने निर्दलीय नामांकन दाखिल किया है। ऐसे में तुलसीपुर विधानसभा का चुनाव रोचक होने के साथ ही काफी दिलचस्प हो गया है,क्योंकि पिछले चुनाव में जेबा यहां दूसरे नंबर पर थीं।और इस बार पुना मैदान में आने से अप्रत्याशित परिणाम से इंकार नहीं किया जा सकता है।

बताया जाता है कि तुलसीपुर विधानसभा सीट से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का खासा लगाव है, क्योंकि इस विधानसभा क्षेत्र में देवीपाटन शक्तिपीठ भी है। इस शक्तिपीठ का संचालन गोरखनाथ पीठ के अधीन है। 51 शक्तिपीठों में भी देवीपाटन का स्थान है। यह सीरिया नदी के तट पर स्थित है। इस विधानसभा सीट की सीमाएं भारत-नेपाल सीमा से सटी हुई हैं। वहीं विकास की दृष्टि से देखें तो यह क्षेत्र अभी भी पिछड़ा हुआ है। 2017 में यहां से भाजपा के कैलाशनाथ शुक्ला विधायक बने थे। उन्होंने पूर्व बाहुबली सांसद रिजवान जहीर की बेटी जेबा रिजवान की हराया था। तुलसीपुर विधानसभा सीट पर भारतीय जनसंघ पार्टी के शुरुआती दौर में कई प्रत्याशी जीतकर विधानसभा पहुंचे। वहीं इस सीट पर 1989 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में रिजवान जहीर को जीत मिली। 1991 में राम मंदिर लहर के कारण भाजपा प्रत्याशी कमलेश कुमार जीतने में सफल रहे। उन्होंने रिजवान जहीर को हराया था। 1993 में रिजवान जहीर ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। यह उनकी दूसरी जीत थी। 1996 में रिजवान जहीर बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े और शानदार जीत दर्ज किए। वर्ष 1996 में रिजवान जहीर के लोकसभा में चले जाने के कारण यह सीट रिक्त हो गई, जिससे 1998 में उपचुनाव हुए। इस चुनाव में बीजेपी के प्रत्याशी कमलेश कुमार सिंह को दूसरी जीत मिली। वहीं 2002 में सपा के प्रत्याशी मसूद खान चुनाव जीते, जबकि 2007 में इस सीट से भाजपा के प्रत्याशी कौशलेंद्र नाथ योगी ने बीजेपी को तीसरी जीत दिलाई। इसके बाद 2012 में समाजवादी पार्टी के अब्दुल मशहूद खान दूसरी बार विधायक चुने गए। 2017 में यह सीट भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई थी। भाजपा ने कैलाश नाथ शुक्ला को चुनाव मैदान में उतारा। इस चुनाव में कुल 16 प्रत्याशी मैदान में थे। बीजेपी के प्रत्याशी कैलाश नाथ शुक्ला को 62296 मत मिले, जबकि बाहुबली पूर्व सांसद रिजवान जहीर की बेटी जेबा रिजवान को 43637 वोट मिले थे। जेबा कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ी थीं। वहीं सपा के अब्दुल मशहूद खान तीसरे स्थान पर रहे। भाजपा ने इस सीट पर जेबा रिजवान को 18659 मतों से हराकर जीत दर्ज की थी।

▶तुलसीपुर सीट का सियासी इतिहास◀

1977, 1980, 1985 – मंगल देव- कांग्रेस
1989- रिजवान जहीर- आईएनडी
1991- कमलेश कुमार- बीजेपी
1993- रिजवान जहीर- सपा
1996- रिजवान जहीर- बसपा
2002- मशहूद खान- सपा
2007- कौशलेंद्र नाथ योगी- बीजेपी
2012- अब्दुल मशहूद खान- सपा
2017- कैलाश नाथ शुक्ला- बीजेपी

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